अब ना कोई काम जगत से,
साधक भोला राम भरोसे।
ज्ञानी भगत हरी भजन परोसे,
भोला साधक राम भरोसे।।
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स्व-स्वरूप अब राम लख़ाना,
राम ही जीना,
राम ही खाना
राम ही जगाना सोना।।
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राम नाम ही स्वप्न सुषुप्ति।
राम नाम ही सिद्ध समाधि।
श्री राम नाम हर सास समाया।
राम नाम हर स्वर वो गाया।।
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राम राम राम राम।
राम नाम ही गाना।
राम राम राम राम।
राम नाम ही गाना।
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राम नाम का नशा जगाया।
भोले भजन त्योहार मनाया।
स्व-स्वरूप सब राम लखाया।
साधक भोला राम समाया।।
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अब ना कोई काम जगत से।
साधक भोला राम भरोसे।
अब ना कोई काम जगत से।
भोला साधक राम भरोसे।।
