बातचीत

कैसे

जो सो रहा हे, उसे कोई जगा पाए।

जो सोने का ढोंग करे, उसे कोन कैसे जगावे!?

जाग जा साधक, जग जा साधक,

यहाँ मुर्दा लाश भी राम भजन जागती हे,

हसती हे, गाती हे, राम मय हो जाती हे।

~

आकाशविश्ववाणी आत्माचिंतन जीवनमुक्तछन्द, ,

भोगंभोग

भोग मुक्त हो जाओ

रोग मुक्त हो जाओगे ।

भव रोग मुक्त हो जाओ

जीवन मुक्त हो जाओगे॥

*

अंतर्मुख हो जाओ, मौन में रहोगे

मौन हो जाओ, चैन में रहोगे।

हृदय से व्यवहार करो, प्यार में रहोगे

प्रभु प्यार में रहो, आनंद में रहोगे॥

*

स्वावलम्बन अपनाओ, सदा स्वस्थ्य रहोगे

भजन सेवा करो, सदा व्यस्त रहोगे।

सहज एकांत पाओ, सदा चुस्त रहोगे 

अघोर सत्य गाओ, सदा मस्त रहोगे॥

*

पागल हो जाओ, दुनियादारी से बचोगे।

पागल हो जाओ, महामारी से बचोगे॥

पागल हो जाओ, यारी प्यारी से बचोगे।

पागल हो जाओ, मारामारी से बचोगे॥

*

आनंदभजन जीवनमुक्तछन्द, , ,

सवालजवाब

सवाल एक ही था, एक ही है, एक ही रहेगा।

मै कौन हूँ? दुनिया क्या है? 

यहा क्या हे मेरा वास्ता?

क्या हे वो रास्ता?

*

भगवान है? नही?

*

अगर है ही नही भगवान

तो बस बने रहो इन्सान।

भोग मगन हैवान

चंद पल के मेहमान।

*

मानो वो है।

तो क्या है वो?

*

जवाब एक ही है

मै हूँ।

बस हूँ।

कुछ नही, कोई नही, कभी नही।

सब कुछ, हर कोई।

*

जरा सोचो साधक भोला

कर ले खुद, खुद की पहचान

कितना जीया बने अंजान

तू तो अपने घर मेहमान

*

पता ज़रूरी हे

काम जारी हे

आत्माचिंतन, ,

क्या मिलेगा?

अगर में ये करुंगा!

तो मुझे क्या मिलेगा?

कब मिलेगा?

{सारा जीवन कुछ पाने में बीत गया}

*

अभी ये सोचो

अभी क्या हे मेरेपास?

क्या दे सकता हू?

कैसे दे सकता हू?

{ये तो बस शुरुआत हे}

~

खुश रहो यार

जीवनमुक्तछन्द, ,

अपना कुछ भी नहीं

जो होना हे

हो रहा हे।

आना जाना।

अपना कुछ भी नहीं।

ना हमने कुछ किया हे।

ना कुछ कमाया हे।

जो आपका हे, वो आपका हे।

जो नहीं हे, वो नहीं हे।

ये दुनिया एक सुंदर बगीचा हे।

करोड़ों फूल खिलते हे यहाँ।

मुरझाते भी हे।

अपना कुछ नहीं।

सब हो रहा हे।

एक सास अंदर 

एक सास बाहर

आप जी रहे हो।

वो जीवन भी आपका नहीं

सब हो रहा हे।

अपना कुछ नहीं।

*

जो अपना हे नहीं

वो अपना समझो मत

उसका मालिक ना बन।

नहीं तो वो चोर कहलाए।

वैसे डकैत तो हो ही आप

जो देह भी अपना नहीं 

उसे खुद मानके चले

चोर कहिके।

अपना कुछ नहीं।

~

आत्माचिंतन जीवनमुक्तछन्द, , ,

आप साधक हो

संन्यासी साधक हे।

संसारी साधक हे।

साधु भी साधक हे।

सिद्ध भी साधक हे।

संत भी साधक हे।

गुरु भी साधक हे।

शिष्य भी साधक हे।

मुमुक्षु भी साधक हे।

महात्मा भी साधक हे।

आप भी साधक हो।

बस साधक ही रहो।

*

और एक बात,

साधक की कोई पहचान नहीं होती।

वो सब में मिला हे,

पर सब के परे हे।

इर्द गिर्द दिखता नहीं,

पर रहता हे।

~

आकाशविश्ववाणी,

उद्यमो भैरव:

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।।ॐअघोरआदेश।।

*

जग जा साधक ।

पुकार आलख ।

छोड दे दुनियादारी ।

प्रभू भजन की तुरीया न्यारी ।।

विश्व { एवं } मित्र

*

ॐअघोरआदेश आकाशविश्ववाणी आत्माचिंतन आनंदभजन जीवनमुक्तछन्द नादसाधनासत्र नाम:स्मरण संतपरमपरावाणी स्तोत्रांजली, , , , ,
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