पूर्ण विराम
अंतर मौन
राम नाम
सीता राम
पूर्ण विराम
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आदेश
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मे मर गया, सो तू भी मरेगा
मारनेवाला, मे से मिलेगा
शिव कैलाश, पता कहेगा
अदबुध मैयत उत्सव होगा
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जय जय जय शंकर नारा, मे से मारा
जय जय जय शंकर न्यारा, मे को मारा
शिव-गुरु तारण हारा, एक सहारा
मे तो हो गया, भगवन प्यारा
मरगया बाबा, नीर अहंकारा
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मे मर गया बाबा, राम नाम सत्य हे, नित्य हे।
चल ना भाई तू , समझता क्यों नहीं
– जिधर किधर हे अटका, उधर से निकलता क्यों नहीं
दिल तेरा दुनियासे फिसलता क्यों नहीं
– फक़ीर साधु बोला दिमाग़ में घुसता क्यों नहीं – तेरे
गुंडा गर्दी, दुनिया दारी, तू छोड़ता क्यू नही?
– क्या सही क्या गलत फैसला, तू करता क्यों नहीं
दुनिया में इज्जत से तू रहता क्यों नहीं
– चार शब्द बाते प्यार के तू बोलता क्यों नहीं?
तू जानता कुछ नही, ये तू मानता क्यों नहीं
– इधर उधर कुछ भी नही, अपने भीतर झाको
मन क्या तेरा शांत हे? राडे-लफड़े लाखों
जाग जा साधक
मे मर गया बाबा
राम नाम सत्य हे
अमर अनंत नित्य हे
नाम सदा में तेरे गाऊ, तेरे गाऊ
सब हे तेरा, में तुम में समाऊँ, में तुम बनजाऊ
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कौन हू में, गुरु तुमने जगाया, स्वरूप लखाया
क्या हे दुनिया, प्रभु तुमने जताया, स्वरूप लखाया
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दूषित मन में, तू अभेद जगाया, परमेश दिखाया
जो भी यहा, तेरी परछाया, तेरी लीला माया
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आनंद तेरा, सनातन चेतन गीत सुनाया, गीत गवाया
गूंज रहा, एक नाद अनाहत, तेरी साद अनाहत
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Thy call
Now & forever, be I Sing Thy sweet name.
All & everything is Yours, be I merge in Thou, I be Thou
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Who I am…? Master, Thy grace has illuminated The Self
What is world…? Thy divine light; unfolded the essence of The Being.
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Striking the non-difference in the impure mind, Thou reveal The Supreme Being
Whatever that is around is but Thy reflection, Thy play, Thy illuminance.
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Thy bliss, resonated unto me, Thathat eternal aLive song, I sing along
Thathat un-struck sound&silence echoes in me as Thy calling