उद्यमो भैरव: ।।ॐअघोरआदेश।। * जग जा साधक । पुकार आलख । छोड दे दुनियादारी । प्रभू भजन की तुरीया न्यारी ।। विश्व { एवं } मित्र * अघोर आत्म मंथन अघोर आनंद भजन आकाशविश्ववाणी जीवनमुक्तछन्दआनंद, गुरूवचन-सत्यवचन, जाग जा, बातचीत, साधक भोला राम भरोसे, साधना