क्या मिलेगा?
अगर में ये करुंगा!
तो मुझे क्या मिलेगा?
कब मिलेगा?
{सारा जीवन कुछ पाने में बीत गया}
*
अभी ये सोचो
अभी क्या हे मेरेपास?
क्या दे सकता हू?
कैसे दे सकता हू?
{ये तो बस शुरुआत हे}
~
खुश रहो यार
अगर में ये करुंगा!
तो मुझे क्या मिलेगा?
कब मिलेगा?
{सारा जीवन कुछ पाने में बीत गया}
*
अभी ये सोचो
अभी क्या हे मेरेपास?
क्या दे सकता हू?
कैसे दे सकता हू?
{ये तो बस शुरुआत हे}
~
खुश रहो यार
इस जिन्दगीके खेल में
कुछ हार है, कुछ जीत है |
सब कुछ यहा पर कुछ नही
ऐसी अजब ये रीत है ||
*
क्या सही क्या है नही
इस खोज में खोता रहा |
ढूंडे कहानी अनकही
में हर दिशा जाता रहा |
ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी।
*
कुछ ये किया कुछ वो किया
अच्छा लगा अपना लिया |
कुछ ये किया कुछ वो किया
जो था गलत दफ़नादिया |
ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी।
*
में कही मंजिल कही
और क्या बनी ये जिंदगी |
तू सही तू सही
तेरे सिवा कोई नही |
ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी।
*
इस जिंदगी के खेल में
अब क्या बसा आराम है |
तू वो ही कर जो मन में है
हर काम में फिर राम है ||
~
थोडा सुख होना थोडा दुख होंना
पर जो भी होना अच्छा होना रे |
तेरे लिए गाऊ में तेरा बन जाऊ
में ऐसी जिंदगानी जीना रे ||
*
सब झूटी मेरी बाते, झुटे है इरादे |
झूटी मेरी चाहत, और झूठे मेरे सपने |
मेरे सपने सच ना होना रे…
तेरे लिए गाऊ में तेरा बन जाऊ
में ऐसी जिंदगानी जीना रे ||
*
ये कैसी कैसी दुनिया, और क्या है दुनियादारी |
ये कैसे रिश्ते नाते, सब क्या है मारामारी |
जो सिनेमे कटारी होना रे…
तेरे लिए गाऊ में तेरा बन जाऊ
में ऐसी जिंदगानी जीना रे ||
*
न कोई मेरा अपना, न कोई है पराया |
तनहाई ने जताया, ये जग है मेरा साया |
अंधेरो में साया भी खोणारे…
तेरे लिए गाऊ में तेरा बन जाऊ
में ऐसी जिंदगानी जीना रे ||
*
में तेरे बिना कैसे जीना, में तेरे बिना कैसे जीना ||
तू नाही कोई नाही, कोई नाही तेरे बिना |
दिन नाही शाम नाही रैना नाही तेरे बिना |
सुख नाही दुख नाही चैन नाही तेरे बिना |
में तेरे बिना कैसे जीना में तेरे बिना कैसे जीना ||
*
तेरे लिए गाऊ में तेरा बन जाऊ
में ऐसी जिंदगानी जीना रे ||
थोडा सुख होना थोडा दुख होंना
पर जो भी होना अच्छा होना रे |
~|
*
जग जा साधक ।
पुकार आलख ।
छोड दे दुनियादारी ।
प्रभू भजन की तुरीया न्यारी ।।
विश्व { एवं } मित्र
*
जो आनंद प्रभु भजन में हे,
जो आनंद तत्व चिंतन में हे,
जो आनंद विषय त्याग में हे {वो भोग में नहीं},
जो आनंद एकांत में हे {संग में नहीं},
*
जो आनंद ध्यान में हे,
जो आनंद मौन में हे,
वो सहज आनंद,
हम से हे, हम में हे, हम ही हे।
*
वो सहज आनंद अपना स्वरूप हे।
वो आनंद राम मय हे।
वो राम आनन्दमय हे।
वो राम ही स्व स्वरूप हे।
*
जगत में हम नहीं, जगत हम में हे।
हम हमेशा हे थे रहेंगे।
हमारा कुछ नहीं।
सब कुछ राम हे।
*
रामनाम स्वयं सर्व व्यापक हे।