आनंद चिंतन

जो आनंद प्रभु-भजन मे हे

{ वो गप-शप मे नही }

जो आनंद तत्व-चिंतन मे हे

{ वो संसार-चिंता से नही }

जो आनंद सरल-त्याग मे हे

{ वो विषय-भोग मे नही }

जो आनंद असंग-एकांत मे हे

{ वो समागम-संग मे नही }

*

जो आनंद – ध्यान मे हे

जो आनंद – मौन मे हे

वो सहज – अघोर आनंद

हम से हे – हम मे हे – हम ही हे

*

वो आनंद – अपना स्वरूप हे

वो आनंद – राम मय हे

वो राम – आनन्दमय हे

वो राम ही स्व स्वरूप हे

*

जगत मे हम नही – जगत हम मे हे

हम तो – हमेशा हे – थे – रहेंगे

हमारा कुछ नही

सब कुछ राम हे

*

रामनाम स्वयं सर्व व्यापक हे

रोम रोम – राम हे

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