सच ना मिला संसार में।
जगत में उलझा, कभी ना सुलझा,
सब लेन देन व्यापार रे।।
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स्वान्तर भीतर ड़ुबकी लगाई,
प्रेमानंद मिला उस पार रे।
भोला साधक सब संत क़हत,
यहा प्यार से हो व्यवहार रे।।
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साधक भोला सरल सहज रह,
मत कर जग से व्यापार रे।
साधक भोला राम भरोसे,
भूल ना जाना प्यार रे।।
