केवल परमार्थ

अभेद भक्ति सावध । साक्षात सत्गुरु सत्संग ।

सृजन नित्य असंग । साधके भजन अभंग ।।

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विरागी शुद्ध मनन । स्पष्ट स्वरूप चिंतन ।

जीवन मुक्त दर्शन । साधके अघोर साधन ।।

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अनंत प्रशांत एकांत । सहज संपूर्ण आनन्द ।

शिव स्वरूप उप स्थित । साधके केवल परमार्थ ।।

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साधक विश्व मित्र

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