जाना – बनजाना

जाना बनजाना
.
जाना वो बनजाना
मन जाना वो बनजाना
सुध बुध मन की खोती रहेगी
ऐसी बाते होती रहेगी
तू जो जाना वो बनजाना
जाना वो बनजाना
मन जाना वो बनजाना
.
यु लाखो सपने लेके
यु लोग चल रहे हर दिशा
हर दिशा कम पड जाए
अगर तू ढूंडे जो तेरे भीतर हे बसा
वो तो तेरे भीतर ही हे
वो तो तेरे भीतर ही हे
तेरा मन क्यू मानत नाही
तेरा दिल क्यू जानत नाही
ऐसी मज़बूरी में
कौन जिया कौन जिया
.
सुध बुध मन की खोती रहेगी
ऐसी बाते होती रहेगी
तू जो जाना वो बनजाना
जाना वो बनजाना
मन जाना वो बनजाना
.
तू खो न जाना
जो मिला
वो बेशक खो देना
फिर कुछ नया पाना
ये पाना खोना
खेल खेलना
.
पर खुद न खोना
इस मायाजाल में
तू खो न जाना
तू खो न जाना
.
माटी मन बर्तन बनजाना
तेरा नाम में हर पल गाना
दूषित मन निर्मल बन जाना
मन जो जाना वो बनजाना
.
सुध बुध मन की खोती रहेगी
ऐसी बाते होती रहेगी
तू जो जाना वो बनजाना
जाना वो बनजाना
~
॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह \’जाना – बनजाना\’
काम जारी हे…

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top
0

Subtotal