बारिश ना हुआ

बारिश ना हुआ
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बारिश ना हुआ
रुखी सुखी हवा
देखो, क्या हमने पाया
चातक मर गया
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कब हम जगेंगे?
जब टूटेगा सुंदर सा सपना?
कब कुछ करेंगे?
जब देखे कोई मरता अपना?
.
देरी ना हो जाए
हम चाहे बत्ती जलाए
अंधेरो मै माचिस धुंडते धुंडते
देरी हो न जाए
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जब रोशनी हे
तभी जानले आनेवाला कल
या लाशे पड़ी हे
तू उनमे पहेचानले अपनी शकल
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बारिश न हुआ
रुखी सुखी हवा
देखा, क्या हमने पाया
चातक मर गया
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खेतोमे बैठे किसान
भीगी आखे देखे आसमान
बस रोटी, कपडा और मकान
पर जीना यहाँ नही आसन
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हर योजना हे सफल
पर खेतो न उगती फसल?
जमीनों पानी भी न लगा
जब किसानो ने खोदा कुआ
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बारिश न हुआ
रुखी सुखी हवा
देखा, क्या हमने पाया
चातक मर गया
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कभी, कही, किसीने कहा
समझो अन्तिम घड़ी मै गुजरता जहा
जब पानी की हो आनीबानी
अधूरी हे हर एक कहानी
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देखो, क्या हमने पाया?
कठिनाई और बद दुआ
बारिश न हुआ
रुखी सुखी हवा
देखा, क्या हमने पाया
चातक मर गया
चातक मर गया
~
॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘सब (कुछ) नहीं’
काम जारी हे…

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