भीतर झाँको

(भीतर की ओर एक मुस्कुराती यात्रा)

हर दिन — थोड़ा और
| समझो |

हर दिन — थोड़ा कम
| उलझो |

भीतर झाँको

मूर्ख बनो — धीरे धीरे,
शांति से, आनंद में,
{ अनुग्रह में }

भीतर झाँको

खिल रहे हो,
फूल बन रहे हो,
उभर रहे हो,
बस ~ बह रहे हो —
{ सजगता में,
न कि जानने में }

भीतर झाँको

यह सब हो रहा है।
साँस चल रही हे।
अंदर और बाहर,
बिना किसी
शंका के।

खुद को बधाई दो —
{ बनने के लिए नहीं, होने के लिए }

खुद को बधाई दो —
इस अद्भुत अनुराग के लिए,
भीतरी अनुसंधान के लिए।

भीतर झाँको

तुमने खोजा हर जगह,
हर जगह खोजा —
उसे, जो तुम्हारा ही था।
और फिर पाया —
वो खोया हुआ ख़ज़ाना,
बस
भीतर झाँककर।

~

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