{ अहु } अहं भाव { संसारी }
तेरा-मेरा, लेना-देना, सकाम-काज कुछ करता हे
खाना-पीना-सोना-उठना, वही-वही वक्त गुजरता हे
भूत-भविस-सपन-सवारे, सकल-जगत यू भटकता हे
हर बात-बात पे, सुखी-दुखी बन, सारा जीवन रोता हे
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सब लिखा हे, सब लिखा, अहु कुछ भी ना पढ़ पाता हे
जो-जो जब-जब होना हे, सो-सो तब-तब होता हे
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{ अवधू } अभाव { साधक – भक्त }
भजन-मगन, प्रभु-प्रीत-सखा बन, सहज मधुर धुन गाता हे
जो भी यहा हो, जैसा भी हे, कण-कण दर्शन पाता हे
कुछ-नाही चाहे, कुछ-नही करता, यू-ही सब हो जाता हे
अघोरानंद साधक भोला, राम भरोसे जीता हे
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सब लिखा हे, सब लिखा, अवधू सब पढ़ पाता हे
जो-जो जब-जब होना हे, सो-सो तब-तब होता हे
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अवधू अघोरानंद साधक भोला, राम भरोसे जीता हे
