अऽउऽम
रे ऽऽ आरपारी !
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ये जीवन हलकेमे मत लेना,
बस हलके फुलके, खुलके जीना।
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ना फुदकना, ना मुरझाना,
थोडा मान-अपमान सहना।
॰॰। यहा सुखी-दुःखी होना, हे सख्त मना। ॰॰
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साहस करना, भूलना-भटकना,
गलती करना, पर कभी ना दोहराना,
सदा सीखना, बासी ना होना, ताजा-ताजा रहना।
थोडा मुस्कुराना, थोडा गुनगुनाना,
खुद-खुशी बाटना, एकांत पाना।
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बली-का-बकरा नाही बनाना
सदा मेरा-मेरा, मे-मे, ना करना,
बस ‘मे’ को पहचानना, जानना,
जाना-बनजाना।
खोजना नाही, खो-जाना।
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कही ना अटकना, कही ना चिपकना,
कुछ भी ना करना, जो-होना वो-होना,
ना कभी पछताना, कभी ना रोना-धोना,
खुद-खुशी मे जीना।
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श्रद्धा जपना, आत्मविश्वास रखना,
चिंता नाही, चिंतन करना,
मन-रंजन नाही, मन-मंथन करना,
कल नाही, कल-भी नाही, आज-भी नाही,
बस अभी-ही जीना।
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स्वस्थ रहना, व्यस्त रेहना, चुस्त रहना
अल् मस्त रहना।
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रे ऽऽ सच्चे ! समृद्ध – संतुष्ट रहना,
जीवन अपरूप गहना, ये व्यर्थ ना गवाना
जिस काम से पधारे, वो जल्द निपटाना,
और यहा से रवाना हो जाना।
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॰॰।काम-तमाम, रोख-इनाम।॰॰
धन्यवाद कहो – दफा हो जाओ।
राऽम राऽम
