अऽउऽम
रे ऽऽ सच्चे ! सही जगह पधारे।
ऽऽ आरपार ऽऽ एक जबर सत् घुमाव ऽऽ एक दिन मे नही सही, एक दिन प्रभु कृपा से हो जाता हे।
ये साधक जीवन एक अखंड परिक्रमा हे, अघोर-आनंद यात्रा हे। बस इस रास्ते चलते चलो। इस राह पे डटके चलना, ही अंतिम मुकाम हे।
ये सबके बस की बात नही। हम उसे नही, वो राह हमे चुनती हे।
सब लिखा हे, अगर ऽ कोई ऽ पढ़ लिया।
वो रस्ता दिखाया, अगर ऽ कोई ऽ चल दिया।
जो जान पाया, जान पाया। जो डूब गया, सो बचगया ।॰
जो मिला खुद-से, खुद-को, जैसे के तैसे ऽऽ आरपार ऽऽ, वह अघोर-आनंद समाया।
बाकी सब अपने-अपने जगह ठीक हे, पर उन-उस सब में वो बात नही, वो बस ऊपरी-ऊपर हे, पर अपार-अपरमपार, ऽऽ आरपार ऽऽ नही।
रे ऽऽ सच्चे ! सदा सावधान, इक-पल ना छूटे आत्मभान।
॰॰। कच्चा मोह-संसार, सच्चा ऽऽ आरपार ऽऽ ।॰॰
जय हो ! सच्चे की।॰
“इस यात्रा मे आपका सदा स्वागत हे।”
