सोचो साधक भोला
क्या ही फरक पडता है?
सब कल्पना मात्र ही तो है।
बाकी है ही क्या? सोचो
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सोचो साधक भोला
क्या ही फरक पडता है?
हम वो नही, जो जीता है।
हम खुद है, वो जिंदगी।
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हम जीव नही, हम जीवन है।
सत् निरंतर निरंजन है॥
हम जीव नही, हम जीवन है।
हम सत् निरंतर निरंजन है॥
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