इस जिन्दगीके खेल में, कुछ हार है, कुछ जीत है
सब कुछ यहा, पर कुछ नही, ऐसी अजब ये रीत है
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क्या सही, क्या है नही, इस खोज में खोता रहा
ढूंडे कहानी अनकही, में हर दिशा जाता रहा
ऐसे जिया, ऐसे जिया जिंदगी।
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कुछ ये किया, कुछ वो किया, अच्छा लगा अपना लिया
कुछ ये किया, कुछ वो किया, जो था गलत दफ़नादिया
ऐसे जिया, ऐसे जिया जिंदगी।
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में कही मंजिल कही, और क्या बनी ये जिंदगी
तू सही, बस तू सही, तेरे सिवा कोई नही
ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी
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इस जिंदगी के खेल में, अब क्या बचा आराम है
तू वो ही कर, जो मन में है, हर काम में फिर राम है
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