वो जो सर्वत्र है, और हे नही
वो सदा यह ही था।
वो भूलसे,
खुद को भूल जाता है
उसका जन्म होता है
वो नाम रूप पाता है।
जो जाना है,
वो जीता है
जब सीखे वो हर पल
तब साधक कहलाता है।
जग जाता है, जागता है, जगाता है।
हिसाब के परे जीता हे।
जीवन संगीत गाता हे।
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“जो जाना, वो बन जाना
अब कही ना आना जाना।”
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“जो ज्ञान वो जीवन उतरा
वो ज्ञान से राह मिलेगी।”
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“जब हृदय प्रभु प्रीत खिलेगी
तब प्रेम की नदी बहेगी।”
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अरे सुन, प्रभु भजन मगन दीवाने
हम जाने तेरे बहाने।
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