बातचीत

सब कैसा हे? जैसा हे, वैसा हे, बढ़िया हे।

क्या हे? सब कुछ, कुछ नहीं

कब हे? बस अभी, कल नहीं ना कल हे।

क्यों हे? ऐसे ही।

किधर हे? आप जिधर हो

दुनिया से कुछ वास्ता? पता नहीं, दुनिया क्या हे।

शादी हुई? पिछले जनम।

कभी प्यार हुआ? जबसे हे, प्यार में हे।

किसके? आप के।

क्या मज़ाक़? दुनिया मज़ाक़।

करते क्या हो? बेकार हूँ।

खर्चा पानी ? बस आप की कृपा हे।

समय कैसे बीतता हे? बस गुनगुनाते रहते हे।

सच क्या हे? सब कुछ नहीं।

आनंद में हो? आनंद हम में हे, हम से हे।

ये आनंद मुफ़्त में हे? ये बिकता नहीं, मुफ़्त भी नहीं।

कुछ अच्छी बुरी आदतें? जो भी आप से लग गई, लग गई।

कुछ करना बाक़ी हे? जी नहीं, जिस काम से आए थे, हो गया

क्या काम? कुछ नहीं।

क्या करोगे? सब हो तो रहा हे, करना क्या हे!

पागल हो? जी बिलकुल।

योगी कौन हे? योगी रोगी ही हे।

रोगी कौन हे? जो भोगी हे।

आप कौन हो? महारोगी।

क्या बीमारी? राम नाम की महामारी।

कोई आख़री ख़्वाहिश? आख़री ऐसा कुछ होता नहीं, जनाब!

मरने का डर? मरना नामुमकिन हे।

समझ? बंधन।

भगवान? साक्षात आप हो

चेतना? आप से ही हे।

कर्म? प्रभु चिंतन।

असफलता? प्रभु इच्छा।

सफलता? प्रभु कृपा।

कुछ कहना बाक़ी हे? और कुछ पूछना बाक़ी हो, तो कहे।

~

संसारी परेशान बन चल निकला, साधक भोला चाय बीड़ी कर निकला।

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