सत् संग भजन – कर तू रोज़ाना
विश्व गीत – सुमधुर स्वर गाना
श्री सत् गुरु मंत्र – निरंतर जपना
हर करम – शंभु समर्पित करना
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बिन सेवा – एक भी पल ना गवाना
तू मुफ़्त का खाना – कभी ना खाना
संसार की खटिया – कही ना सोना
जब दुनिया सोवे – तब तू जगना
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उस शून्य गुफा – तू डटके रहना
ना कही आना – कही ना जाना
यहा तेरा – कुछ भी ना लेना देना
जो मन चाहे गाली – दे ये जमाना
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पर साधक भोले – मस्त तू रेहेंना
अलख अमल, अल्-मस्त खजाना
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रे ऽ सच्चे !
