राधेशाम
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पानी में मछली बने
तू पंछी बने आसमा में
लाखो हे रूप तेरे
तू ही हर दिशा इस जहा में
राधेशाम राधेशाम
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में जी रहा हु इस माया नगरिया में
तेरी परछाई मेरी छाव हे
अब तुझसे में क्या सब छुपाऊ
तुनेही लिखी ये कहानी
में खुदसे यु अब न जी पाउ
तेरे नाम हे जिंदगानी
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अंधेरोमे सूरज बने
तू पानी बने रेगिस्तान में
तू धुप में तरुवर बने
तुही हर दिशा इस जहामे
राधेशाम राधेशाम
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॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘हरिहर हरिहर’
काम जारी हे…
