जीवनशाला
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जो तुम चाहो
वो मिल जाए
सच्ची हो अगर सदा
मेरे मन ने
ये जाना हे
किया हे फैसला
तू जानेगा, तू मानेगा
तू सीखेगा, ये जीवनशाला
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तनहा भटकना
माथे पसीना
ऐसी कठोर जिंदगी
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धुप में थकना
छाव में रुकना
ऐसा सफ़र जिंदगी
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हर पल जो गुजरा हे
मन में वो उतरा हे
कुछ अच्छा हे कुछ बुरा
ये हे जीवनशाला
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मन से सब बाते
होती रहती हे
मन ही हे साथी अभी
मन ये सब जाने
सब सही पहचाने
मन गाफिल न करना कभी
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ये सारा मन का हे खेल
जीवन सुख दुःख का मेल
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इन बातोका सिलसिला
ये हे जीवनशाला
~
॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘सब (कुछ) नहीं’
काम जारी हे…
