जय अलख निरंजन

अलख अमल, अल्-मस्त खजाना

सत् संग भजन – कर तू रोज़ाना

विश्व गीत – सुमधुर स्वर गाना

श्री सत् गुरु मंत्र – निरंतर जपना

हर करम – शंभु समर्पित करना

*

बिन सेवा – एक भी पल ना गवाना

तू मुफ़्त का खाना – कभी ना खाना

संसार की खटिया – कही ना सोना

जब दुनिया सोवे – तब तू जगना

*

उस शून्य गुफा – तू डटके रहना

ना कही आना – कही ना जाना

यहा तेरा – कुछ भी ना लेना देना

जो मन चाहे गाली – दे ये जमाना

*

पर साधक भोले – मस्त तू रेहेंना

*

ॐ अघोर आदेश अघोर आत्म भान अघोर आनंद भजन, , ,
Scroll to Top
0

Subtotal