भजन आनंद

अलख अमल, अल्-मस्त खजाना

सत् संग भजन – कर तू रोज़ाना

विश्व गीत – सुमधुर स्वर गाना

श्री सत् गुरु मंत्र – निरंतर जपना

हर करम – शंभु समर्पित करना

*

बिन सेवा – एक भी पल ना गवाना

तू मुफ़्त का खाना – कभी ना खाना

संसार की खटिया – कही ना सोना

जब दुनिया सोवे – तब तू जगना

*

उस शून्य गुफा – तू डटके रहना

ना कही आना – कही ना जाना

यहा तेरा – कुछ भी ना लेना देना

जो मन चाहे गाली – दे ये जमाना

*

पर साधक भोले – मस्त तू रेहेंना

*

ॐ अघोर आदेश अघोर आत्म भान अघोर आनंद भजन, , ,

इधर गया वो उधर भी भटका

सच ना मिला संसार में।

जगत में उलझा, कभी ना सुलझा,

सब लेन देन व्यापार रे।।

*

स्वान्तर भीतर ड़ुबकी लगाई,

प्रेमानंद मिला उस पार रे।

भोला साधक सब संत क़हत,

यहा प्यार से हो व्यवहार रे।।

*

साधक भोला सरल सहज रह,

मत कर जग से व्यापार रे।

साधक भोला राम भरोसे,

भूल ना जाना प्यार रे।।

अघोर आनंद भजन,

सच बता यार!

तू कौन हे? खुद कौन हे? और कौन हे तेरा खुदा?

सब हे यहाँ, सब हे तेरा, अब और क्या तू चाहता?

सच में बता, सच ही बता, और क्या तू चाहता?

*

रब हे तेरा, रब तुझमें हे, अब और क्या तुझे चाहिए?

क्यू ऐसी हरकत कर रहा? तुझको करे तुझसे जुदा?

क्यू ऐसी हरकत कर रहा? खुद को करे खुदसे जुदा?

*

तू कौन हे? क्यों हे यहाँ? इस जग से क्या तेरा वासता?

तेरे दिल में क्या ? खुल कर बता, क्यू खफ़ा यू हो रहा?

तू बेख़बर, और बेवजाह, यहाँ वहाँ, भटका घूमा?

*

तू कौन हे? खुद कौन हे? और कौन हे तेरा खुदा?

रब हे तेरा, रब तुझमें हे, अब और क्या तुझे चाहिए?

क्यू ऐसी हरकत कर रहा? तुझको करे तुझसे जुदा?

क्यू ऐसी हरकत कर रहा? खुद को करे खुदसे जुदा?

~

अघोर आत्म मंथन अघोर आनंद भजन,

जागो!

लाखों सपने इरादे, ना एक हकिकत होवे,

फिर भी तू तकता जावे, फिर भी तू थकता जावे।

*

और जब एक भी इच्छा पार हुई, तब दूजी अपना राज चलावे।

ये तो मायाजाल रचा हे, इंद्रधनु मृगजाल गवाह हे,

अजब रसायन बनके मन में, तुमको इसमें खींच रहा हे।

अजब रसायन बनके मन में, तुमको इसमें खींच रहा हे।

*

तू भवर में डूबा जावे, अब कोन तुम्हें बतलावे,

और कोन किसे हे बचावे, कोन किसे हे बचावे।

*

एक ही साध्य है, एक हे साधन, एक गुरु हे, एक हे भगवन।

साधक खुद ही खुद को जगावे, साधक खुद ही खुद को जगावे।

~

साधक भोला राम भरोसे, ले खाली झोला प्यार परोसे

अघोर आत्म भान अघोर आनंद भजन,

अवधू अघोर आनंद

अवधूता, अवधूता

गीत गाता

प्रभु-प्रीत जगाता

सत्संग समाता

असंग जीता

अवधूता

*

अवधूता, अवधूता

धूनी रमाता

अलख लगता

चिलम चिताता

शून्य मे रमता

अवधूता

*

अवधूता, अवधूता

खूद को खोता

गगन समाता

ना कभी जीता

ना कभी मरता

अवधूता

*

अवधूता, अवधूता

कुछ नहीं करता

दिख नहीं पाता

बन सबकी माता

विश्व चलाता

अवधूता

*

आदेश नाथ गुरु शिष्य सहारा

सत् गुरु वचन संजीवन गीता

अवधूता, अवधूता

~

ॐ अघोर आदेश अघोर आनंद भजन, , , ,

नाम

नाम सदा में तेरे गाऊ, तेरे गाऊ

सब हे तेरा, में तुम में समाऊँ, में तुम बनजाऊ

*

कौन हू में, गुरु तुमने जगाया, स्वरूप लखाया

क्या हे दुनिया, प्रभु तुमने जताया, स्वरूप लखाया

दूषित मन में, तू अभेद जगाया, परमेश दिखाया

जो भी यहा, तेरी परछाया, तेरी लीला माया

*

आनंद तेरा, सनातन चेतन गीत सुनाया, गीत गवाया

गूंज रहा, एक नाद अनाहत, तेरी साद अनाहत

*

Thy call

Now & forever, be I Sing Thy sweet name. 

All & everything is Yours, be I merge in Thou, I be Thou

*

Who I am…? Master, Thy grace has illuminated The Self 

What is world…? Thy divine light; unfolded the essence of The Being.

*

Striking the non-difference in the impure mind, Thou reveal The Supreme Being

Whatever that is around is but Thy reflection, Thy play, Thy illuminance.

*

Thy bliss, resonated unto me, Thathat eternal aLive song, I sing along

Thathat un-struck sound&silence echoes in me as Thy calling 

अघोर आनंद भजन, ,

खेल

इस जिन्दगीके खेल में, कुछ हार है, कुछ जीत है

सब कुछ यहा, पर कुछ नही, ऐसी अजब ये रीत है

*

क्या सही, क्या है नही, इस खोज में खोता रहा

ढूंडे कहानी अनकही, में हर दिशा जाता रहा

ऐसे जिया, ऐसे जिया जिंदगी।

*

कुछ ये किया, कुछ वो किया, अच्छा लगा अपना लिया

कुछ ये किया, कुछ वो किया, जो था गलत दफ़नादिया

ऐसे जिया, ऐसे जिया जिंदगी।

*

में कही मंजिल कही, और क्या बनी ये जिंदगी

तू सही, बस तू सही, तेरे सिवा कोई नही

ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी

*

इस जिंदगी के खेल में, अब क्या बचा आराम है

तू वो ही कर, जो मन में है, हर काम में फिर राम है

~

अघोर आनंद भजन,

भज अघोर गणेश

जय गणेश, जय-जय गणेश, जय-जय-जय गणपति सरकार,

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार

भजे भक्तगण गणाधीश रे सेवा कर स्वीकार

*

एक प्रार्थना, एक ही विनती

सदाचार हो, ना मति भ्रांति 

प्रीत हृदय हो, सत सुख शांति {हो मन निर्मल सुविचार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा कर स्वीकार}

*

आप ही तारे, आप सवारे, 

आप बचाये, आप से सिखा

साधक भगत तू राह दिखाया, { हो जीवन साकार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ स्वीकार}

भजे भक्तजन, गणपति देवा, जीवन हो साकार

*

पशु पिशाच, तोरे ही शरण हे

भूत प्रेत, सुर असुर पूजते

हर हर हर हर, हर शिवगण के {आप सुमुख सरदार 

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ स्वीकार}

*

राम नाम, आदेश स्मरण हे

मंगल सुकुशल, सब पावन हे।

जग चेतन, तुमसे रोशन, जो { तेरी, कृपा, आरपार

ॐअघोरानंद, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ साद स्वाद स्वीकार}

*

मूढ जगत जब, स्वार्थ साधते

साधन सामग्री तोहे पूजते

भटके खोये, हर पल रोए, दीन हीन संसार

भजे भक्तगण, गणाधीश सब सपने कर साकार}

*

कहा पधारे, सत् गुरु आश्रम मे

श्रवण, मनन चिंतन अनुभव मे

सहज सरल ख़ुद को पहचाने {त्रिभुवन के सूत्रधार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ स्वीकार}

*

अखण्ड जीवन स्वात्म मंथन

अलखनिरंजन अलख निरंजन

अलक्ष लक्षण गुह्य प्रकट {तू मालिक सुनो पुकार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार

*

दूषित मन जो जगत मे खोया

वो ही मन तू भजन रमाया

सब जब खोया, खुद को पाया, ऐसा) चमत्कार 

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार

*

अघोर भगत, तेरे भजन मगन हे 

साधन काज तव भक्ति सुगम हे 

दिव्य मूर्ति अखंड स्मरण {अनजाना साक्षात्कार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार}

साधक साधु संत भगत के,

गुरु प्रेषक, सहारा बनके

एक प्रेरणा, एक उगम {तू शक्ति मूलाधार

हो सेवा सार्थ स्वीकार}

*

सत् संग, भजन, आरती, कीर्तन,

ये जीवन प्रभुनाद सनातन

स्पंद प्रणव प्रतिसाद अनाहत, { तू महत् शून्य आकार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार}

*

अघोर आनंद भजन, ,
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