खेल

इस जिन्दगीके खेल में 

कुछ हार है, कुछ जीत है |

सब कुछ यहा पर कुछ नही

ऐसी अजब ये रीत है ||

*

क्या सही क्या है नही

इस खोज में खोता रहा |

ढूंडे कहानी अनकही

में हर दिशा जाता रहा |

ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी।

*

कुछ ये किया कुछ वो किया

अच्छा लगा अपना लिया |

कुछ ये किया कुछ वो किया

जो था गलत दफ़नादिया |

ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी।

*

में कही मंजिल कही

और क्या बनी ये जिंदगी |

तू सही तू सही

तेरे सिवा कोई नही |

ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी।

*

इस जिंदगी के खेल में

अब क्या बसा आराम है |

तू वो ही कर जो मन में है

हर काम में फिर राम है ||

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आनंदभजन, , ,