राम रसायन

आनंद चिंतन

जो आनंद प्रभु-भजन मे हे

{ वो गप-शप मे नही }

जो आनंद तत्व-चिंतन मे हे

{ वो संसार-चिंता से नही }

जो आनंद सरल-त्याग मे हे

{ वो विषय-भोग मे नही }

जो आनंद असंग-एकांत मे हे

{ वो समागम-संग मे नही }

*

जो आनंद – ध्यान मे हे

जो आनंद – मौन मे हे

वो सहज – अघोर आनंद

हम से हे – हम मे हे – हम ही हे

*

वो आनंद – अपना स्वरूप हे

वो आनंद – राम मय हे

वो राम – आनन्दमय हे

वो राम ही स्व स्वरूप हे

*

जगत मे हम नही – जगत हम मे हे

हम तो – हमेशा हे – थे – रहेंगे

हमारा कुछ नही

सब कुछ राम हे

*

रामनाम स्वयं सर्व व्यापक हे

रोम रोम – राम हे

ॐ अघोर आदेश अघोर आत्म भान, ,

मे मरगया बाबा

आदेश

*

मे मर गया, सो तू भी मरेगा

मारनेवाला, मे से मिलेगा

शिव कैलाश, पता कहेगा

अदबुध मैयत उत्सव होगा

*

जय जय जय शंकर नारा, मे से मारा

जय जय जय शंकर न्यारा, मे को मारा

शिव-गुरु तारण हारा, एक सहारा

मे तो हो गया, भगवन प्यारा

मरगया बाबा, नीर अहंकारा

*

मे मर गया बाबा, राम नाम सत्य हे, नित्य हे।

ॐ अघोर आदेश अघोर आनंद भजन, , , ,

चल ना भाई

चल ना भाई तू , समझता क्यों नहीं

– जिधर किधर हे अटका, उधर से निकलता क्यों नहीं

दिल तेरा दुनियासे फिसलता क्यों नहीं

– फक़ीर साधु बोला दिमाग़ में घुसता क्यों नहीं – तेरे

गुंडा गर्दी, दुनिया दारी, तू छोड़ता क्यू नही?

– क्या सही क्या गलत फैसला, तू करता क्यों नहीं

दुनिया में इज्जत से तू रहता क्यों नहीं

– चार शब्द बाते प्यार के तू बोलता क्यों नहीं?

तू जानता कुछ नही, ये तू मानता क्यों नहीं

– इधर उधर कुछ भी नही, अपने भीतर झाको

मन क्या तेरा शांत हे? राडे-लफड़े लाखों

जाग जा साधक

मे मर गया बाबा

राम नाम सत्य हे

अमर अनंत नित्य हे

ॐ अघोर आदेश अघोर आत्म मंथन अघोर आनंद भजन, , , , ,

रोम रोम ऽ राम राम ऽ आर पार

राऽम राऽम, रोम ऽ रोम, राऽम नाऽम रे।

श्री राम नाम, रोऽम रोऽम, राऽम राऽम रे॰

राऽम राऽम, पूर्ण साऽर, आऽर पाऽर रे।

श्री राम नाम, रोऽम रोऽम, आऽर पाऽर रे॰

अघोर आनंद भजन, , ,

प्रकट गुह्य

संपूर्ण मे अपरिवर्तनीय परिवर्तन – प्रकट गुह्य

EVERY POUR OF EXISTENCE IS FILLED WITH DIVINE DIVINITY.

{ राम रसायन }

RAAMA RASAAYANA.

EVERYTHING IS { राम } RAAMA.

THROUGH AND THROUGH { आरपार }.

SOLID FLUX

{ आनन्दघन }

SOLID SPACE. दिव्य द्रव्य DIVINE DIVINITY.

अघोर आत्मभान obvious internalisation

INTERNALISATION

THE SILENCE & THE SOULITUDE

आरपार

होशियार हो तड़ीपार फ़रार

लगातार बरकरार हर बार

सरकार आधार बेकार

प्यार यार संसार बलात्कार

चमत्कार निराधार लाचार

सारासार विचार सत्कार

इसपार या उसपार, जीले आरपार

निर्विकार

नमस्कार सार साक्षात्कार

कोई आर, या कोई पार,

सच्चा समझदार आरपार

अघोर आत्म भान, ,
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