आनंद चिंतन
जो आनंद प्रभु-भजन मे हे
{ वो गप-शप मे नही }
जो आनंद तत्व-चिंतन मे हे
{ वो संसार-चिंता से नही }
जो आनंद सरल-त्याग मे हे
{ वो विषय-भोग मे नही }
जो आनंद असंग-एकांत मे हे
{ वो समागम-संग मे नही }
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जो आनंद – ध्यान मे हे
जो आनंद – मौन मे हे
वो सहज – अघोर आनंद
हम से हे – हम मे हे – हम ही हे
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वो आनंद – अपना स्वरूप हे
वो आनंद – राम मय हे
वो राम – आनन्दमय हे
वो राम ही स्व स्वरूप हे
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जगत मे हम नही – जगत हम मे हे
हम तो – हमेशा हे – थे – रहेंगे
हमारा कुछ नही
सब कुछ राम हे
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रामनाम स्वयं सर्व व्यापक हे
रोम रोम – राम हे
