रे सच्चे

ओ भोले साधक!

परमार्थ में मन नहीं लगता,

मन संसार स्वार्थ में रमता,

जप जाप ताप सा भाता

अब क्या करे साधक?

*

ओ भोले साधक!

मन लगने से जप नहीं होता,

जप जपनेसे से मन लगता हे,

स्वरूप साधना में।

*

जीवन में साधना की नहीं जाती,

साधना में जीवन जीते हे,

जीवन ही साधना हे,

सदा सर्वदा।

अघोर आत्म भान अघोर आत्म मंथन, , ,

रे ऽ प्यारे ! शुरू तो करो

साधु संत सत् वचन – को माने

अब तो खुद को – शिष्य तू जाने

हर अनुभव से सीखे – वो साधक

ये दुनिया – जीवनशाला प्यारे

यह जो सिखा – सो जीवन उतारा

खुद देखा उजियाला – प्यारा

*

ये दुनिया – रख जैसी वैसी

ये दुनिया – तो ऐसी ही थी

ऐसी ही रहेगी

दुनिया से – क्या लेना देना?

सारा जीवन – व्यर्थ गवाना

हर पल – कुछ भी – सीख ना आना

*

यहा सच्चा – जो करने आया

अब तो काम – वही हे करना

साधक भोला – राम भरोसे

गुरु चरण पे – माथ टिकाके

शुरू करो साधना

बस शुरू करो साधना

*

रे ऽ प्यारे ! बस तुम शुरू तो करो यारा

अघोर आत्म मंथन अघोर आनंद भजन, ,

अलख अमल, अल्-मस्त खजाना

सत् संग भजन – कर तू रोज़ाना

विश्व गीत – सुमधुर स्वर गाना

श्री सत् गुरु मंत्र – निरंतर जपना

हर करम – शंभु समर्पित करना

*

बिन सेवा – एक भी पल ना गवाना

तू मुफ़्त का खाना – कभी ना खाना

संसार की खटिया – कही ना सोना

जब दुनिया सोवे – तब तू जगना

*

उस शून्य गुफा – तू डटके रहना

ना कही आना – कही ना जाना

यहा तेरा – कुछ भी ना लेना देना

जो मन चाहे गाली – दे ये जमाना

*

पर साधक भोले – मस्त तू रेहेंना

*

ॐ अघोर आदेश अघोर आत्म भान अघोर आनंद भजन, , ,

खेल

इस जिन्दगीके खेल में, कुछ हार है, कुछ जीत है

सब कुछ यहा, पर कुछ नही, ऐसी अजब ये रीत है

*

क्या सही, क्या है नही, इस खोज में खोता रहा

ढूंडे कहानी अनकही, में हर दिशा जाता रहा

ऐसे जिया, ऐसे जिया जिंदगी।

*

कुछ ये किया, कुछ वो किया, अच्छा लगा अपना लिया

कुछ ये किया, कुछ वो किया, जो था गलत दफ़नादिया

ऐसे जिया, ऐसे जिया जिंदगी।

*

में कही मंजिल कही, और क्या बनी ये जिंदगी

तू सही, बस तू सही, तेरे सिवा कोई नही

ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी

*

इस जिंदगी के खेल में, अब क्या बचा आराम है

तू वो ही कर, जो मन में है, हर काम में फिर राम है

~

अघोर आनंद भजन,
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