विश्वामित्र

केवल परमार्थ

अभेद भक्ति सावध । साक्षात सत्गुरु सत्संग ।

सृजन नित्य असंग । साधके भजन अभंग ।।

*

विरागी शुद्ध मनन । स्पष्ट स्वरूप चिंतन ।

जीवन मुक्त दर्शन । साधके अघोर साधन ।।

*

अनंत प्रशांत एकांत । सहज संपूर्ण आनन्द ।

शिव स्वरूप उप स्थित । साधके केवल परमार्थ ।।

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साधक विश्व मित्र

अघोर आत्म भान अघोर आनंद भजन,

उद्यमो भैरव:

उद्यमो भैरव:

जग जा साधक ।

पुकार आलख ।

छोड दे दुनियादारी ।

प्रभू भजन की तुरीया न्यारी ।।

विश्व { एवं } मित्र

उद्यमो भैरव:

ॐ अघोर आदेश अघोर आनंद भजन, , , , ,
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