दिल पतंग

दिल पतंग
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दिल पतंग दिल पतंग
आसमान में उड़े जा रहा हे
भूल जा हर दिशा
हर दिशा नशा छा रहा हे
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ये हवा संग तेरा तन चले जहा

तू वहां जाएगा
ये घटा संग तेरा मन चले
तू वहां जाएगा
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जो जमी पाएगा
वो तेरा जहा बन जाएगा
पर अगर पर झड जाए
तो ये हवा… कुछ कर न पाए
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दिल पतंग दिल पतंग

आसमान में उड़े जा रहा हे
भूल जा हर दिशा
हर दिशा नशा छा रहा हे

.
दिल तरंग दिल तरंग
जल जल में खिले जा रहा हे
हर लहर हर लहर
हर सफ़र में नशा हो रहा हे
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जो मिला … तू भीतर समाना
जो समाया …  वो तू बन जारे
खुद की खोज में तू बेह जाए
खुद से मिल तू खुश हो जाए
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दिल तरंग दिल तरंग
जल जल में खिले जा रहा हे
हर लहर हर लहर
हर सफ़र में नशा हो रहा हे
~
॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘जाना – बनजाना’
काम जारी हे…

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