भज अघोर गणेश

जय गणेश, जय-जय गणेश, जय-जय-जय गणपति सरकार,

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार

भजे भक्तगण गणाधीश रे सेवा कर स्वीकार

*

एक प्रार्थना, एक ही विनती

सदाचार हो, ना मति भ्रांति 

प्रीत हृदय हो, सत सुख शांति {हो मन निर्मल सुविचार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा कर स्वीकार}

*

आप ही तारे, आप सवारे, 

आप बचाये, आप से सिखा

साधक भगत तू राह दिखाया, { हो जीवन साकार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ स्वीकार}

भजे भक्तजन, गणपति देवा, जीवन हो साकार

*

पशु पिशाच, तोरे ही शरण हे

भूत प्रेत, सुर असुर पूजते

हर हर हर हर, हर शिवगण के {आप सुमुख सरदार 

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ स्वीकार}

*

राम नाम, आदेश स्मरण हे

मंगल सुकुशल, सब पावन हे।

जग चेतन, तुमसे रोशन, जो { तेरी, कृपा, आरपार

ॐअघोरानंद, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ साद स्वाद स्वीकार}

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मूढ जगत जब, स्वार्थ साधते

साधन सामग्री तोहे पूजते

भटके खोये, हर पल रोए, दीन हीन संसार

भजे भक्तगण, गणाधीश सब सपने कर साकार}

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कहा पधारे, सत् गुरु आश्रम मे

श्रवण, मनन चिंतन अनुभव मे

सहज सरल ख़ुद को पहचाने {त्रिभुवन के सूत्रधार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ स्वीकार}

*

अखण्ड जीवन स्वात्म मंथन

अलखनिरंजन अलख निरंजन

अलक्ष लक्षण गुह्य प्रकट {तू मालिक सुनो पुकार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार

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दूषित मन जो जगत मे खोया

वो ही मन तू भजन रमाया

सब जब खोया, खुद को पाया, ऐसा) चमत्कार 

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार

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अघोर भगत, तेरे भजन मगन हे 

साधन काज तव भक्ति सुगम हे 

दिव्य मूर्ति अखंड स्मरण {अनजाना साक्षात्कार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार}

साधक साधु संत भगत के,

गुरु प्रेषक, सहारा बनके

एक प्रेरणा, एक उगम {तू शक्ति मूलाधार

हो सेवा सार्थ स्वीकार}

*

सत् संग, भजन, आरती, कीर्तन,

ये जीवन प्रभुनाद सनातन

स्पंद प्रणव प्रतिसाद अनाहत, { तू महत् शून्य आकार

भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार}

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