सब व्यसन हे।
अच्छाई बुराई;
सब व्यसन हे।
अर्थ परमार्थ;
सब व्यसन हे।
कला स्वार्थ;
भलापन बुरापन;
बुढ़ापा बचपन;
सब व्यसन हे।
श्रद्धा साधन;
आत्मक्लेश परमेश;
जानना बनना;
सब हे, कुछ नहीं ;
में हू, जगत हे;
कृष्ण, राम, शिव, ब्रह्मा
सब व्यसन हे।
जताना, निभाना;
मौज भजन गाना;
सब व्यसन हे।
कल जो मंदिर मेखाना नजर आता था,
आज वो मेखाना मंदिर नजर आता हे।
अब साला व्यसन ही खुद में जीता हे।
पियक्कड़ साधक भोला, रात दिन पिता हे।
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काम जारी हे।
असुविधा के लिये खेद हे।
