आसमान में लाख है तारे
उन सब में दिखते चेहरे तुम्हारे
मूढ़ भगत जब मती मन खोवे
तोरे दर्शन तब सुध बुध पावे
तोरे नाम प्रीत स्वर गावे
वो उन्मन मंदिर बन जावे
रघुपती तुम बीन कैसे संवारे
जीवन नैया पार पधारे
आसमान में लाख है तारे
उन सब में दिखते चेहरे तुम्हारे
