जय गणेश, जय-जय गणेश, जय-जय-जय गणपति सरकार,
भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार
भजे भक्तगण गणाधीश रे सेवा कर स्वीकार
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एक प्रार्थना, एक ही विनती
सदाचार हो, ना मति भ्रांति
प्रीत हृदय हो, सत सुख शांति {हो मन निर्मल सुविचार
भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा कर स्वीकार}
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आप ही तारे, आप सवारे,
आप बचाये, आप से सिखा
साधक भगत तू राह दिखाया, { हो जीवन साकार
भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ स्वीकार}
भजे भक्तजन, गणपति देवा, जीवन हो साकार
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पशु पिशाच, तोरे ही शरण हे
भूत प्रेत, सुर असुर पूजते
हर हर हर हर, हर शिवगण के {आप सुमुख सरदार
भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ स्वीकार}
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राम नाम, आदेश स्मरण हे
मंगल सुकुशल, सब पावन हे।
जग चेतन, तुमसे रोशन, जो { तेरी, कृपा, आरपार
ॐअघोरानंद, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ साद स्वाद स्वीकार}
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मूढ जगत जब, स्वार्थ साधते
साधन सामग्री तोहे पूजते
भटके खोये, हर पल रोए, दीन हीन संसार
भजे भक्तगण, गणाधीश सब सपने कर साकार}
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कहा पधारे, सत् गुरु आश्रम मे
श्रवण, मनन चिंतन अनुभव मे
सहज सरल ख़ुद को पहचाने {त्रिभुवन के सूत्रधार
भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेऽवा सार्थ स्वीकार}
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अखण्ड जीवन स्वात्म मंथन
अलखनिरंजन अलख निरंजन
अलक्ष लक्षण गुह्य प्रकट {तू मालिक सुनो पुकार
भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार
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दूषित मन जो जगत मे खोया
वो ही मन तू भजन रमाया
सब जब खोया, खुद को पाया, ऐसा) चमत्कार
भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार
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अघोर भगत, तेरे भजन मगन हे
साधन काज तव भक्ति सुगम हे
दिव्य मूर्ति अखंड स्मरण {अनजाना साक्षात्कार
भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार}
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साधक साधु संत भगत के,
गुरु प्रेषक, सहारा बनके
एक प्रेरणा, एक उगम {तू शक्ति मूलाधार
हो सेवा सार्थ स्वीकार}
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सत् संग, भजन, आरती, कीर्तन,
ये जीवन प्रभुनाद सनातन
स्पंद प्रणव प्रतिसाद अनाहत, { तू महत् शून्य आकार
भजे भक्तगण, गणाधीश हो सेवा सार्थ स्वीकार}
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