ज्ञान भक्ति के पर फैलाकर,
स्वरूप गगन में उड़ज़ा साधक।
*
आत्म कृपा की धूनी चिताकर,
सत्संग भजन में रमजा साधक।
*
राम नाम की अलख लगाकर,
महत शून्य में खोजा साधक।
ज्ञान भक्ति के पर फैलाकर,
स्वरूप गगन में उड़ज़ा साधक।
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आत्म कृपा की धूनी चिताकर,
सत्संग भजन में रमजा साधक।
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राम नाम की अलख लगाकर,
महत शून्य में खोजा साधक।