गुरूवचन-सत्यवचन

भोगंभोग

भोग मुक्त हो जाओ

रोग मुक्त हो जाओगे ।

भव रोग मुक्त हो जाओ

जीवन मुक्त हो जाओगे॥

*

अंतर्मुख हो जाओ, मौन में रहोगे

मौन हो जाओ, चैन में रहोगे।

हृदय से व्यवहार करो, प्यार में रहोगे

प्रभु प्यार में रहो, आनंद में रहोगे॥

*

स्वावलम्बन अपनाओ, सदा स्वस्थ्य रहोगे

भजन सेवा करो, सदा व्यस्त रहोगे।

सहज एकांत पाओ, सदा चुस्त रहोगे 

अघोर सत्य गाओ, सदा मस्त रहोगे॥

*

पागल हो जाओ, दुनियादारी से बचोगे।

पागल हो जाओ, महामारी से बचोगे॥

पागल हो जाओ, यारी प्यारी से बचोगे।

पागल हो जाओ, मारामारी से बचोगे॥

*

आनंदभजन जीवनमुक्तछन्द, , ,

दो कहा हे?

सवाल एक ही था

एक ही हे

एक ही रहेगा।

में कौन हूँ?

~ होशियार को जगत में बस एक ही सवाल होता हे।~

साला में हूँ कौन?

जवाब एक ही था

एक ही हे

एक ही रहेगा।

कुछ नहीं। कोई नहीं। कभी नहीं।

सब कुछ। हर कोई। हर कही।

वो भी नहीं, ये भी नहीं।

सब कुछ। कुछ नहीं।

सब {कुछ} नहीं।

सदा स्वस्वरूप

*

{ आदेश }

कुछ बन मत साधक

ना ईश्वर, ना गुरु, ना संत, ना भगवान।

जब तक यह हे

साधक हे।

जब साधो हर पल,

तो साधक।

*

गुरुक्रिपा असीम अपार।

गुरुमाई वात्सल्य चमत्कार।

आत्म चिंतन ही परमेश्वर चिंतन

आत्म ज्ञान ही परमेश्वर ज्ञान

आत्म कृपा ही ईश कृपा

{ गुरु वचन – सत्य वचन }

दो कहा हे? कहा हे दो!?

~

बस चिंतन करना हे, भोले!

आत्माचिंतन, ,

उद्यमो भैरव:

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।।ॐअघोरआदेश।।

*

जग जा साधक ।

पुकार आलख ।

छोड दे दुनियादारी ।

प्रभू भजन की तुरीया न्यारी ।।

विश्व { एवं } मित्र

*

ॐअघोरआदेश आकाशविश्ववाणी आत्माचिंतन आनंदभजन जीवनमुक्तछन्द नादसाधनासत्र नाम:स्मरण संतपरमपरावाणी स्तोत्रांजली, , , , ,

आनंद चिंतन

जो आनंद प्रभु भजन में हे,

जो आनंद तत्व चिंतन में हे,

जो आनंद विषय त्याग में हे {वो भोग में नहीं},

जो आनंद एकांत में हे {संग में नहीं},

*

जो आनंद ध्यान में हे,

जो आनंद मौन में हे,

वो सहज आनंद,

हम से हे, हम में हे, हम ही हे।

*

वो सहज आनंद अपना स्वरूप हे।

वो आनंद राम मय हे।

वो राम आनन्दमय हे।

वो राम ही स्व स्वरूप हे।

*

जगत में हम नहीं, जगत हम में हे।

हम हमेशा हे थे रहेंगे।

हमारा कुछ नहीं।

सब कुछ राम हे।

*

रामनाम स्वयं सर्व व्यापक हे।

आकाशविश्ववाणी आत्माचिंतन जीवनमुक्तछन्द, ,

जीवनमुक्ति

खाना पीना,

जगना सोना,

पाना खोना,

लेना देना,

रोना धोना,

जीना मरना,

सब संसार हे,

स्वार्थ हे

*

तत्व चिंतन साधना,

परमार्थ हे

*

बोध होना, जाना बनजाना,

जीवनमुक्ति हे

आकाशविश्ववाणी,

अहम

में जानता हूँ,

ये अहंकार हे।

*

में नहीं जानता,

ये भी अहंकार हे।

*

में हूँ,

ये अहंभाव हे।

*

बस में ही हूँ,

ये स्वस्वरूप हे।।

~

गुरूवचन सत्यवचन

।।ॐ अघोर आदेश।।

ॐअघोरआदेश,

सत्चिदानंद

ॐ आनन्दम ॐ सत्चिदानंद ॐ तत् सत्।

*

{ सत् }

परमात्मा शुद्ध चैतन्य

{भगवान-ब्रम्हन-नारायण-परमशिव-राम}

जो कहना कह लो।

*

{ चित }

परमात्मा की अनंत शक्ति

{चितशक्ति-आनंदशक्ति-इच्छाशक्ति-ज्ञानशक्ति-क्रियाशक्ति}

जो कहना कह लो।

*

{आनंद}

शक्ति की अभिव्यक्ति

{स्वातंत्र्य-मुक्ति}

जो कहना कह लो।

~

गुरूवचन सत्यवचन

।। ॐ अघोर आदेश ।।

ॐअघोरआदेश
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