व्यसन

सब व्यसन हे।

अच्छाई बुराई;

सब व्यसन हे।

अर्थ परमार्थ;

सब व्यसन हे।

कला स्वार्थ;

भलापन बुरापन;

बुढ़ापा बचपन;

सब व्यसन हे।

श्रद्धा साधन;

आत्मक्लेश परमेश;

जानना बनना;

सब हे, कुछ नहीं ;

में हू, जगत हे;

कृष्ण, राम, शिव, ब्रह्मा

सब व्यसन हे।

जताना, निभाना;

मौज भजन गाना;

सब व्यसन हे।

कल जो मंदिर मेखाना नजर आता था,

आज वो मेखाना मंदिर नजर आता हे।

अब साला व्यसन ही खुद में जीता हे।

पियक्कड़ साधक भोला, रात दिन पिता हे।

~

काम जारी हे।

असुविधा के लिये खेद हे।

जीवनमुक्तछन्द,

क्या मिलेगा?

अगर में ये करुंगा!

तो मुझे क्या मिलेगा?

कब मिलेगा?

{सारा जीवन कुछ पाने में बीत गया}

*

अभी ये सोचो

अभी क्या हे मेरेपास?

क्या दे सकता हू?

कैसे दे सकता हू?

{ये तो बस शुरुआत हे}

~

खुश रहो यार

जीवनमुक्तछन्द, ,

नाद योग

नाद योग सहज योग

नाद योग सनातन योग

नाद योग आत्म योग

नाद योग प्रणव योग

नाद योग अक्षर योग

नाद योग स्वर योग

नाद योग शब्द योग

नाद योग श्रुति योग

नाद योग जप योग

नाद योग मंत्र योग

नाद योग भजन योग

नाद योग तंत्र योग

नाद योग शिव योग

नाद योग शक्ति योग

नाद योग भक्ति योग

नाद योग क्रिया योग

नाद योग प्रलय योग

नाद योग लय योग

नाद योग नित्य योग

नाद योग अघोर योग

नाद योग भैरव योग

नाद योग शून्य योग

नाद योग हंस योग

नाद योग सत योग

नाद योग विश्व योग

नाद योग परब्रह्म योग

नाद योग संपूर्ण योग

नाद योग सत्संग योग

नाद योग आनंद योग

Blog,

खेल

इस जिन्दगीके खेल में 

कुछ हार है, कुछ जीत है |

सब कुछ यहा पर कुछ नही

ऐसी अजब ये रीत है ||

*

क्या सही क्या है नही

इस खोज में खोता रहा |

ढूंडे कहानी अनकही

में हर दिशा जाता रहा |

ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी।

*

कुछ ये किया कुछ वो किया

अच्छा लगा अपना लिया |

कुछ ये किया कुछ वो किया

जो था गलत दफ़नादिया |

ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी।

*

में कही मंजिल कही

और क्या बनी ये जिंदगी |

तू सही तू सही

तेरे सिवा कोई नही |

ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी।

*

इस जिंदगी के खेल में

अब क्या बसा आराम है |

तू वो ही कर जो मन में है

हर काम में फिर राम है ||

~

अघोर आनंद भजन, , ,

सुख दुख

थोडा सुख होना थोडा दुख होंना 

पर जो भी होना अच्छा होना रे |

तेरे लिए गाऊ में तेरा बन जाऊ

में ऐसी जिंदगानी जीना रे ||

*

सब झूटी मेरी बाते, झुटे है इरादे |

झूटी मेरी चाहत, और झूठे मेरे सपने |

मेरे सपने सच ना होना रे…

तेरे लिए गाऊ में तेरा बन जाऊ

में ऐसी जिंदगानी जीना रे ||

*

ये कैसी कैसी दुनिया, और क्या है दुनियादारी |

ये कैसे रिश्ते नाते, सब क्या है मारामारी |

जो सिनेमे कटारी होना रे…

तेरे लिए गाऊ में तेरा बन जाऊ

में ऐसी जिंदगानी जीना रे ||

*

न कोई मेरा अपना, न कोई है पराया |

तनहाई ने जताया, ये जग है मेरा साया |

अंधेरो में साया भी खोणारे…

तेरे लिए गाऊ में तेरा बन जाऊ

में ऐसी जिंदगानी जीना रे ||

*

में तेरे बिना कैसे जीना, में तेरे बिना कैसे जीना ||

तू नाही कोई नाही, कोई नाही तेरे बिना |

दिन नाही शाम नाही रैना नाही तेरे बिना |

सुख नाही दुख नाही चैन नाही तेरे बिना |

में तेरे बिना कैसे जीना में तेरे बिना कैसे जीना ||

*

तेरे लिए गाऊ में तेरा बन जाऊ

में ऐसी जिंदगानी जीना रे ||

थोडा सुख होना थोडा दुख होंना 

पर जो भी होना अच्छा होना रे |

~|

अघोर आनंद भजन, ,

अपना कुछ भी नहीं

जो होना हे

हो रहा हे।

आना जाना।

अपना कुछ भी नहीं।

ना हमने कुछ किया हे।

ना कुछ कमाया हे।

जो आपका हे, वो आपका हे।

जो नहीं हे, वो नहीं हे।

ये दुनिया एक सुंदर बगीचा हे।

करोड़ों फूल खिलते हे यहाँ।

मुरझाते भी हे।

अपना कुछ नहीं।

सब हो रहा हे।

एक सास अंदर 

एक सास बाहर

आप जी रहे हो।

वो जीवन भी आपका नहीं

सब हो रहा हे।

अपना कुछ नहीं।

*

जो अपना हे नहीं

वो अपना समझो मत

उसका मालिक ना बन।

नहीं तो वो चोर कहलाए।

वैसे डकैत तो हो ही आप

जो देह भी अपना नहीं 

उसे खुद मानके चले

चोर कहिके।

अपना कुछ नहीं।

~

अघोर आत्म मंथन जीवनमुक्तछन्द, , ,

तू साधु

\"\"
साधु साधु

मानले

जानले

आनंद ले

जानके

*

तू साधु

*

जीवन मुक्त

*

तू साधु

*

सेवा धर्म तेरा

हृदय प्रेम भरा

साधना कर्म तेरा

तू साधु

*

अघोर आनंद भजन आकाशविश्ववाणी, , ,

दो कहा हे?

सवाल एक ही था

एक ही हे

एक ही रहेगा।

में कौन हूँ?

~ होशियार को जगत में बस एक ही सवाल होता हे।~

साला में हूँ कौन?

जवाब एक ही था

एक ही हे

एक ही रहेगा।

कुछ नहीं। कोई नहीं। कभी नहीं।

सब कुछ। हर कोई। हर कही।

वो भी नहीं, ये भी नहीं।

सब कुछ। कुछ नहीं।

सब {कुछ} नहीं।

सदा स्वस्वरूप

*

{ आदेश }

कुछ बन मत साधक

ना ईश्वर, ना गुरु, ना संत, ना भगवान।

जब तक यह हे

साधक हे।

जब साधो हर पल,

तो साधक।

*

गुरुक्रिपा असीम अपार।

गुरुमाई वात्सल्य चमत्कार।

आत्म चिंतन ही परमेश्वर चिंतन

आत्म ज्ञान ही परमेश्वर ज्ञान

आत्म कृपा ही ईश कृपा

{ गुरु वचन – सत्य वचन }

दो कहा हे? कहा हे दो!?

~

बस चिंतन करना हे, भोले!

अघोर आत्म मंथन, ,

आप साधक हो

संन्यासी साधक हे।

संसारी साधक हे।

साधु भी साधक हे।

सिद्ध भी साधक हे।

संत भी साधक हे।

गुरु भी साधक हे।

शिष्य भी साधक हे।

मुमुक्षु भी साधक हे।

महात्मा भी साधक हे।

आप भी साधक हो।

बस साधक ही रहो।

*

और एक बात,

साधक की कोई पहचान नहीं होती।

वो सब में मिला हे,

पर सब के परे हे।

इर्द गिर्द दिखता नहीं,

पर रहता हे।

~

आकाशविश्ववाणी,

उद्यमो भैरव:

\"\"
।।ॐअघोरआदेश।।

*

जग जा साधक ।

पुकार आलख ।

छोड दे दुनियादारी ।

प्रभू भजन की तुरीया न्यारी ।।

विश्व { एवं } मित्र

*

अघोर आत्म मंथन अघोर आनंद भजन आकाशविश्ववाणी जीवनमुक्तछन्द, , , , ,

काम जारी हे

जागो साधक प्यारे! जरा सोचो जीवन क्या रे?

अब ही तो सार्थ समय हे, तू बाद में ना पछता रे।

*

अब किसको क्या है जताना? दुनिया में सुख पद सोना?

और कितना क्या पाना है? और कहा किधर जाना है?

*

कबसे तू काम जुटा हे, कब होगी व्यर्थ कामना पूरी।

कुछ वादे कुछ मजबूरी, बस ये आखरी बात अधूरी॥

*

कहाता तू काम है जारी, ये हो खतम ना ज़िम्मेदारी।

ये तो चलता ही रहेगा, रह गयी आखरी बात अधूरी॥

*

बस इतना जब कर लू में, तब चैन की साँस लू भाई

फिर तो में चल ही पडुंगा, वो राह जो तुम ने दिखाई

*

अब, जागो साधक प्यारे

बाद में क्यू पछता रे?

*

एक दिन तो ऐसा आवे, गुरु स्थूल की चाह मिटावे।

तेरे दिल में प्रभु पधारे, तुझे प्रीत की राह दिखावे ॥

अघोर आनंद भजन आकाशविश्ववाणी जीवनमुक्तछन्द, , ,

भूल ना जाना प्यार रे

इधर गया वो उधर भी भटका,

सच ना मिला संसार में।

जगत में उलझा, कभी ना सुलझा,

सब लेन देन व्यापार रे।।

*

स्वान्तर भीतर ड़ुबकी लगाई,

प्रेमानंद मिला उस पार रे।

भोला साधक सब संत क़हत,

यहा प्यार से हो व्यवहार रे।।

*

साधक भोला सरल सहज रह,

मत कर जग से व्यापार रे।

साधक भोला राम भरोसे,

भूल ना जाना प्यार रे।।

अघोर आनंद भजन

आनंद चिंतन

जो आनंद प्रभु भजन में हे,

जो आनंद तत्व चिंतन में हे,

जो आनंद विषय त्याग में हे {वो भोग में नहीं},

जो आनंद एकांत में हे {संग में नहीं},

*

जो आनंद ध्यान में हे,

जो आनंद मौन में हे,

वो सहज आनंद,

हम से हे, हम में हे, हम ही हे।

*

वो सहज आनंद अपना स्वरूप हे।

वो आनंद राम मय हे।

वो राम आनन्दमय हे।

वो राम ही स्व स्वरूप हे।

*

जगत में हम नहीं, जगत हम में हे।

हम हमेशा हे थे रहेंगे।

हमारा कुछ नहीं।

सब कुछ राम हे।

*

रामनाम स्वयं सर्व व्यापक हे।

अघोर आत्म मंथन आकाशविश्ववाणी जीवनमुक्तछन्द, ,

जीवनमुक्ति

खाना पीना,

जगना सोना,

पाना खोना,

लेना देना,

रोना धोना,

जीना मरना,

सब संसार हे,

स्वार्थ हे।

*

तत्व चिंतन साधना,

परमार्थ हे।

*

बोध होना, जाना बनजाना,

जीवनमुक्ति हे।

आकाशविश्ववाणी,

अहम

में जानता हूँ,

ये अहंकार हे।

*

में नहीं जानता,

ये भी अहंकार हे।

*

में हूँ,

ये अहंभाव हे।

*

बस में ही हूँ,

ये स्वस्वरूप हे।।

~

गुरूवचन सत्यवचन

।।ॐ अघोर आदेश।।

Blog,

सत्चिदानंद

ॐ आनन्दम ॐ सत्चिदानंद ॐ तत् सत्।

*

{ सत् }

परमात्मा शुद्ध चैतन्य

{भगवान-ब्रम्हन-नारायण-परमशिव-राम}

जो कहना कह लो।

*

{ चित }

परमात्मा की अनंत शक्ति

{चितशक्ति-आनंदशक्ति-इच्छाशक्ति-ज्ञानशक्ति-क्रियाशक्ति}

जो कहना कह लो।

*

{आनंद}

शक्ति की अभिव्यक्ति

{स्वातंत्र्य-मुक्ति}

जो कहना कह लो।

~

गुरूवचन सत्यवचन

।। ॐ अघोर आदेश ।।

Blog

ओ साधक प्यारे!

ज्ञान भक्ति के पर फैलाकर,

स्वरूप गगन में उड़ज़ा साधक।

*

आत्म कृपा की धूनी चिताकर,

सत्संग भजन में रमजा साधक।

*

राम नाम की अलख लगाकर,

महत शून्य में खोजा साधक।

अघोर आनंद भजन आकाशविश्ववाणी जीवनमुक्तछन्द, ,

अब ना कोई काम जगत से 

अब ना कोई काम जगत से,

साधक भोला राम भरोसे।

ज्ञानी भगत हरी भजन परोसे,

भोला साधक राम भरोसे।।

*

स्व-स्वरूप अब राम लख़ाना,

राम ही जीना,

राम ही खाना

राम ही जगाना सोना।।

*

राम नाम ही स्वप्न सुषुप्ति।

राम नाम ही सिद्ध समाधि।

श्री राम नाम हर सास समाया।

राम नाम हर स्वर वो गाया।।

*

राम राम राम राम।

राम नाम ही गाना।

राम राम राम राम।

राम नाम ही गाना।

*

राम नाम का नशा जगाया।

भोले भजन त्योहार मनाया।

स्व-स्वरूप सब राम लखाया।

साधक भोला राम समाया।।

*

अब ना कोई काम जगत से।

साधक भोला राम भरोसे।

अब ना कोई काम जगत से।

भोला साधक राम भरोसे।।

अघोर आनंद भजन

नाम

नाम सदा में तेरे गाऊ, तेरे गाऊ।

सब हे तेरा में तुम में समाऊँ, में तुम बनजाऊ।

*

कौन हू में, गुरु तुमने लखाया, स्वरूप जगाया।

क्या हे दुनिया, प्रभु तुमने जगाया, स्वरूप लखाया।

*

दूषित मन में, तू अभेद जगाया, परमेश दिखाया।

जो भी यहा, तेरी परछाया, तेरी लीला माया।

*

आनंद तेरा, सनातन चेतन गीत सुनाया, गीत गवाया।

गूंज रहा, एक नाद अनाहत, तेरी साद अनाहत।

*

नाम सदा में तेरे गाऊ, तेरे गाऊ।

सब हे तेरा, में तुम में समाऊँ, में तुम बनजाऊ।

नाम सदा में तेरे गाऊ, तेरे गाऊ।

*

Now & forever, be I Sing Thy sweet name.

All & everything is Yours, be I merge in Thou, I be Thou

*

Who I am…? Master Thy grace has illuminated The Self

What is world…? Thy light; unfolded the essence of The Self

*

Striking the non-difference in impure mind, Thou reveal The Supreme Being

Whatever that is around is but Thy reflection, Thy play, Thy illuminance

*

Thy bliss, resonated unto me, Thathat eternal aLive song, I sing along

Thathat unstruck sound&silence echoes in me as Thy calling

अघोर आनंद भजन

राम भरोसे

साधक भोला राम भरोसे।

भोला साधक नाम भरोसे।

*

प्रभु चिंतन, सत्संग भजन रमता हे।

सुंदर शिव, अघोर सत्य जपता हे।।

*

सत् भाव-सहज, प्रीत सखा जनी जीता।

एकांत शांत-सुख, शून्य धूनी वो रमाता।।

*

गम्भीर सुमुख, चेतन गोरख सब भाता।

शुभ्र चित्त, एकाग्र मती स्वर पाता।।

*

साधु-संत-गुरु-नाथ वचन मनी स्मरता।

आदेश श्रवण, उत्स्फूर्त वचन धुन गाता।।

*

साधक भोला राम भरोसे।

भोला साधक नाम भरोसे।।

*

परमार्थ उपासक, स्वरूप – सेवक।

उद्यम भैरव, मुक्त सदाशिव।

हृदयी बालक, राम भगत-हरी भजे।

*

प्रभु-चिंतन, सत्संग भजन में रमता।

सुंदर शिव, अघोर सत्य में समाता।।

*

भोला साधक नाम भरोसे

साधक भोला राम भरोसे

अघोर आनंद भजन
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